Kyon hum itne bade ho gaye 1


Wo bhi kya din the……
Mummy ki godh, or Papa ke kandhe,

Na kal ki chinta, na future k sapne,

Ab kal ki hai fikar, aur adhure hai sapne,

Mud kar dekha to, bahut door hai apne,

Manzilon ko dhundte hum kaha kho gaye,

Kyun hum itne bade ho gaye…


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One thought on “Kyon hum itne bade ho gaye

  • shanu siddiqui

    लौट जाता हू वापस घर कि और हर रोज थका हारा… आज तक समझ नहीं आया कि काम करने के लिए जीता हूं या जीने के लिए काम करता हूं..बचपन में बार बार सबका पूछा गया सवाल…बड़े होकर क्या बनना हैं,, जवाब अब मिला … फिर से बच्चा बनना हैं.. थक गया हुं तेरी नौकरी से ए जिंदगी….मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे.. दोस्तों से बिछड़कर ये हकीकत खुली वेशक कमीने थे..पर रोनक उन्ही से थे..भरी जेब से दुनिया की पहचान करावाई….और खाली जेब से अपनों की…. जब लगें पैसे कमाने समझ आया … तो समझ आया कि शौक तो मां बाप के पैसों से पूरे होतें थे…. अपने पैसों से तो बस जरुरतें पूरी हो पाती हैं.. हसने का दिल न हो तो भी हसना पड़ता हैं…कोई जब पूछे कैसे हो …कहना पड़ता मजें में कहना पड़ता है…ये जिंदगी का ड्रामा है दोस्तों… यहा हर एक को नाटक करना पड़ता हैं… माचिस की जरुरत यहां नहीं पड़ती … यहा तो आदमी आदमी से जलना पड़ता हैं… दुनिया साईटिस्ट ढ़ूंड रहें हैं… कि मरीज की जिंदगी है या नहीं …पर आदमी यह नहीं ढ़ूंड रहा… कि जिंदगी में खुशी है कि नहीं ,,, नींद में और मौत क्या फर्क हैं किसी ने क्या खुबसुरत जवाब दिया हैं .. नींद आधी मौत हैं और मौत मुक्कमल नींद हैं….जिंदगी तो अपने ही तरीके से चलती हैं…औरो के सहारे तो जनाजे उठा करते हैं …सुबह होती हैं शाम होती उम्र यू ही तमाम होती हैं…कोई रोकर दिल बहलाता है कोई हस कर दर्द छुपाता हैं… कया करामत हैं कुदरत की जिंदा इंसान पानी में डूबता हैं और मुर्दा तैर कर दिखता हैं… बस ये कंडक्टर सी हो गई हैं…सफर भी रोज का है और जाना भी कहीं नहीं…हर सवाल का जवाब में ढूंडता रहा…और अपने कमरे मे जाते ही जवाब मिल गये…छत ने कहा की उंची सोच रखों पंखे ने कहा ठंडे रहो….घड़ी ने कहा हर वक्त कीमती हैं…शीशे ने कहा कुछ करने से पहले अपने अंदर झाकं लो… खिड़की ने कहा दुनिया को देख लो… कलेन्डर ने कहा अप-टू-डेट रहों..और दरवाजे ने कहा …अपनी मंजिल पाने के लिए पूरा जोर लगाओ… लकीरे भी बड़ी अजीब होती हैं… माथे पर खिच जाए तो किस्मत बना देती हैं …जमीन पर खीच जाए तो शरहदे बना देती हैं.. खाल पर खीच जाए तो खून ही निकाल देती हैं…और रिश्ते पर खीच जाए तो दीवार बना देती हैं …एक रुपया एक लाख नहीं होता …मगर फिर भी एक रुपिया एक लाख से निकल जाये तो वो लाख भी नहीं रहता…हम आप लाखो दोस्तों में से एक वो ही रुपया है… संभालकर रखिएगा ..बाकी सब झूट हवस और फरेब हैं……………..