साल

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इकबाल ने १०० साल पहले कहा था

इकबाल ने १०० साल पहले कहा था; वतन की फ़िक्र कर नादान; मुसीबत आने वाली है; तेरी बरबादियों के मश्वारें है आसमानों में; न संभलोगे तुम मिट जाओगे हिंदुस्तान वालों; तुम्हारी दास्ताँ तक भी न होंगी दास्तानों में! संभल जाओ अभी तो. भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ो. भारत को बचाओ.