आज फिर से गुज़रा


आज फिर से गुज़रा लम्हा याद दिलाया उसने,
अपना ज़िक्र छेड़ कर रुलाया उसने,
हँसे तो थे उसके सामने ,
देख कर भी नजाने क्यों फिर भी नज़रों को चुराया उसने।