परम संबंध

परम संबंध: एक किताब की तरह है वो कितनी भी पुराणी हो जाए पर उसके अलफ़ाज़ नहीं बदलेंगे| कभी याद आये तो पन्ने पलट के देखना| हम आज जैसे है वैसे ही मिलेंगे!

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